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पत्रकारिता--- व्यावहारिक पत्रकारिता

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व्यावहारिक पत्रकारिता

प्रतिक्रिया            पत्रकारिता सीखें HomeContact Usपत्रकारिता सीखें मीडिया गतिविधियाँ आपकी रायGuest BookGalleryNew Articlesअमर उजालाप्रतिक्रिया व्यावहारिक   पत्रकारिता
दिल से कलम तक
कुछ बातें ऐसी होती हैं जो जेहन में तब तक फंसी रहती हैं जब तक उन्हें कागज पर उतार न दिया जाए। कलम और कागज के पेशे में पिछले इक्कीस साल से हूं। जब शुरुआत की थी, तब शायद यह सपना भी नहीं था कि कोई किताब लिखने का प्रयास भी करने के लायक हो सकता हूं। पर समय बहुत बलवान है। संघर्ष की भट्टी में तपने वाले दौर के दौरान जो चीजें कठिन लगती हैं, बाद में जाकर वही अनुभव का रुप ले जाती हैं। उस दौर में कुछ लोग विरोध की मुद्रा में होते हैं जिन्हें संघर्ष कर रहा व्यक्ति दुश्मन की श्रेणी में गिन लेता है। पर उस दौर के बीत जाने के बाद किया गया आत्म मंथन कहता है कि यदि कोई रुकावट बना ही न होता तो उन रुकावटों से निपटने का अनुभव कहां से आता?
कुछ व्यक्तित्व होते हैं जिनकी छाप अंतर्मन में इतनी गहराई तक पैवस्त होती है कि सोते जागते उन्ही के ख्याल आते हैं। मुझे पत्रकारिता में हिंदी मिलाप के संपादक आदरणीय यश जी लाए थे। पहली …