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वफ़ा का खंजर by प्रेमचंद

Wednesday, June 17, 2009

जयगढ़ और विजयगढ़ दो बहुत ही हरे-भ्ररे, सुसंस्कृत, दूर-दूर तक फैले हुए, मजबूत राज्य थे। दोनों ही में विद्या और कलाद खूब उन्न्त थी। दोनों का धर्म एक, रस्म-रिवाज एक, दर्शन एक, तरक्की का उसूल एक, जीवन मानदण्ड एक, और जबान में भी नाम मात्र का ही अन्तर था। जयगढ़ के कवियों की कविताओं पर विजयगढ़ वाले सर धुनते और विजयगढ़ी दार्शनिकों के विचार जयगढ़ के लिए धर्म की तरह थे। जयगढ़ी सुन्दरियों से विजयगढ़ के घर-बार रोशन होते थे और विजयगढ़ की देवियां जयगढ़ में पुजती थीं। तब भी दोनों राज्यों में ठनी ही नहीं रहती थी बल्कि आपसी फूट और ईर्ष्या-द्वेष का बाजार बुरी तरह गर्म रहता और दोनों ही हमेशा एक-दूसरे के खिलाफ़ खंजर उठाए थे। जयगढ़ में अगर कोई देश को सुधार किया जाता तो विजयगढ़ में शोर मच जाता कि हमारी जिंदगी खतरे में है। इसी तरह तो विजयगढ़ में कोई व्यापारिक उन्नति दिखायी देती तो जयगढ़ में शोर मच जाता था। जयगढ़ अगर रेलवे की कोई नई शाख निकालता तो विजयगढ़ उसे अपने लिए काला सांप समझता और विजयगढ़ में कोई नया जहाज तैयार होता तो जयगढ़ को वह खून पीने वाला घडियाल नजर आता था। अगर यह बदुगमानि…

शहीद तात्या टोपे को उनके बलिदान दिवस पर शत शत नमन/ 20.04.2012

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Wall Photos महान क्रन्तिकारी और १८५७ के पहले स्वतंत्रता संग्राम के सेनापति स्वर्गीय तात्या टोपे को उनके बलिदान दिवस पर शत शत नमन

Rabindranath Tagore with Bengali writers, 1912 just before a trip to England.

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Wall Photos
Rabindranath Tagore with eminent Bengali writers, 1912 just before a trip to England.

(from right) Sitting – Satyendranath Dutta, Jatindramohan Bagchi, Karunanidhan Bandopadhay.
Standing – Prabhat Kumar Mukhopadhya, Manilal Gangopadhya,
Dwijendra Narayan Bagchi, Charuchandra Bandopadhya.

अमर क्रन्तिकारी रास बिहारी बोस जी जापानी धर्म पत्नी तोशिको जी के साथ

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netaji subhash chander bose भारत के अमर क्रन्तिकारी रास बिहारी बोस जी का अति दुर्लभ फोटो उनकी जापानी धर्म पत्नी तोशिको जी के साथ ..
(उनकी धर्म पति का नाम तोशिको है )
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी कि स्मृतियाँ उनकी मौत को हमारे राष्ट्र के भ्रष्ट मंत्रियों ने तो गुमनाम होने दिया परन्तु हम उन्हें गुमनाम नहीं होने देंगे हमारा प्रयास है की हम माँ भारती के हर सच्चे सपूत के कर्मो को उनके पुन्य विचारों को हर भारत वासी तक पहुंचाए ,यही हमारा राष्ट्र धेये हैं उनकी हर यादों को संजो कर रखना ताकि आने वाले हर युग के नवीन विचारको को अपने राष्ट्र के पूर्वजो के पुन्य विचारों से अनुग्रहित करा सके ...ताकि हर आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास पुरुषो को जान सके और गर्व से कह सके ...जय हिंद जय माँ भारती ............
by: सरफ़रोशी की तमन्ना

भारतीय लोककथाएं

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Friday, June 26, 2009
११/ईश्वर की खो इब्राहीम आधी रात में अपने महल में सो रहा था। सिपही कोठे पर पहरा दे रहे थे। बादशाह का यह उद्देश्य नहीं था कि सिपाहियों की सहायता से चोरों और दुष्ट मनुष्यों से बचा रहे, क्योंकि वह अच्छी तरह जानता था कि जो बादशाह न्यायप्रिय है, उसपर कोई विपत्ति नहीं आ सकती, वह तो ईश्वर से साक्षात्कार करना चाहता था।
एक दिन उसने सिंहासन पर सोते हुए किसके कुछ शब्द और धमाधम होने की आवाज सुनी।
वह अपने दिल में विचारने लगा कि यह किसीकी हिम्मत है, जो महल के ऊपर चढ़कर इस तरह धामाके से पैरे रक्खे! उसने झरोखों से डांटकर कहा, ‘कौन है?’’
ऊपर से लोगों ने सिर झुकाकर कहा, ‘‘रात में हम यहां कुछ ढूंढ़ने निकले हैं।’’
बादशाह ने पूछा, ‘‘क्या ढूंढ़ने निकले हैं?’’
लोगों ने उत्तर दिया, ‘‘हमारा ऊंट खो गया है उसे।’’
बादशाह ने कहा, ‘‘ऊपर कैसे आ सकता है?’’
उन लोगों ने उत्तर दिया, ‘‘यदि इस सिंहासन पर बैठकर, ईश्वर से मिलने की इच्छा की जा सकती है तो महल के ऊपर ऊंट भी मिल सकता हैं।’’
इस घटना के बाद बादशाह को किसीने महल में नहीं देखा। वह लोगों की नजर से गायब हो गया।

[इब्राहीम…