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महात्मा गांधी की छाया जैसे थे महादेव देसाई

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अन्य फोटोगांधी जी के साथ महादेव देसाई की एक

First Published:14-08-10 01:39 PM Last Updated:14-08-10 01:40 PM ई-मेलप्रिंटटिप्पणियॉ: (0)अ+अ- बेहतरीन विचारक, लेखक तथा विख्यात स्वतंत्रता सेनानी महादेव देसाई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बेहद करीबी थे और जीवन भर उनकी छाया की तरह रहे। गांधीवादी सुरेंद्र कुमार के अनुसार महादेव देसाई जीवन भर गांधी जी की छाया की तरह उनके साथ रहे और 1942 में जब आगा खां महल में उनका निधन हुआ, उस समय भी वह गांधी जी के साथ थे। कुमार के अनुसार शुरू से गांधी जी के विचारों से प्रभावित महादेव देसाई उच्च कोटि के विचारक और बेहतरीन लेखक थे। महात्मा गांधी के विचारों के कार्यान्वयन में महादेव देसाई की अहम भूमिका र…

प्रेमग्रंथ -

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प्रेमग्रंथ - संजय कुमार शर्माSunday ३१.
"प्रेम-ग्रंथ"


"जब रोम-रोम मेरे,किशोर
पुलकित होता,
जब श्वाँस-श्वाँस तन ताप
... उग्र किंचित होता,

तब शुष्क धरा पर यह
कैसा मृदु ओस दिखा,
वह प्रेम बीज बोता
उस पर संतोष दिखा,

वह महा शक्ति मेरे
शिव में संलयित हुई,
तब महाकाल में ज्योति
किरण प्रज्जवलित हुई,

वह कौन? पीसता मेरी
शिलाएँ,चूर्ण करे,
वह उर्ध्व चिन्ह,क्षैतिज-
रेखा को पूर्ण करे,

ऋण चिन्ह हुआ धन चिन्ह,
जागता काम लगे,
यह प्रेम-ग्रंथ संजय का
चिर संग्राम लगे,

हरती पीड़ा हर महादेव की,
शक्ति पुंज वह,
धन-धान्य,स्वर्ग वैभव देती
एक देव कुंज वह

यह पंचभूत और विकट शून्य
मिलकर मनु जीव बनाते हैं,
रज-वीर्य,अंड और शुक्र,संत!
जप-ध्यान-जोग दर्शाते हैं,

तुम आदिशक्ति मैं आदि देव,
तुम आदि भूत मैं अंतहीन,
मैं क्रियाहीन तुम ध्यानमग्न,
तुम रजस्वला,मैं दैव दीन,

तुम खंड-खंड में व्याप्त मेरे,
मैं तेरे खंड से चिर प्रचंड,
तुम अंड-अंड,मैं शुक्र-शुक्र,
शिवशक्ति मिलन जीवन अखंड,

तब कौन मूर्ख कहता है,
मेरे प्रेमग्रंथ को काम ग्रंथ,
संजय धृतराष्ट्र नहीं केशव,
तब तो रचता निर्वाण पंथ,

क्या धरती पर हल चला रहा,
व…

वटवृक्ष पर आपका स्वागत है

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ज़िन्दगी के दर्द ह्रदय से निकलकर बन जाते हैं कभी गीत, कभी कहानी, कोई नज़्म, कोई याद ......जो चलते हैं हमारे साथ, ....... वक़्त निकालकर बैठते हैं वटवृक्ष के नीचे , सुनाते हैं अपनी दास्ताँ उसकी छाया में । लगाते हैं एक पौधा उम्मीदों की ज़मीन पर और उसकी जड़ों को मजबूती देते हैं ,करते हैं भावनाओं का सिंचन उर्वर शब्दों की क्यारी में और हमारी बौद्धिक यात्रा का आरम्भ करते हैं.... आप सभी का स्वागत है इस यात्रा में कवयित्री रश्मि प्रभा के साथ .....
()मुखपृष्ठ ()परिकल्पना () ब्लोगोत्सव()ब्लॉग परिक्रमा () शब्द सभागार () प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ () साहित्यांजलि () शब्द शब्द अनमोल ()चौबे जी की चौपाल परिकल्पना की नयी पहल :वटवृक्ष पर आपका स्वागत है , पधारने के लिए धन्यवाद ! एक ऐसी ई-पत्रिका जिसमें  आप साहित्य ,संस्कृति और सरोकार से एकसाथ रूबरू होते हैं . जहां आपकी सदिच्छा के अनुरूप सामग्रियां मिलती है. जो आपकी सृजनात्कता को पूरे विश्व की सृजनात्मकता से जोड़ने को सदैब प्रतिबद्ध रहती है.              अपनी रचनाएँ इस ई-मेल पर भेजें : parikalpanaa@gmail.com  Monday, July 30, 2012