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राष्ट्रीय सेमिनार व कार्यशाला (20-21 सितंबर, 2013)

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23 August 2013 at 20:44 राष्ट्रीय सेमिनार व कार्यशाला (20-21 सितंबर, 2013)
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा महाराष्ट्र

हिंदी ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया पर आधारित राष्ट्रीय विचारगोष्ठी की तारीख तय कर ली गयी है। यह सेमिनार 20-21 सितंबर, 2013 को आयोजित होगा। इस सेमिनार के प्रस्तावित प्रारूप का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत है:
हिंदी ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया पर आधारित राष्ट्रीय विचारगोष्ठी महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा द्वारा आयोजित की जा रही है।सेमिनार स्थल वर्धा विश्वविद्यालय का प्रांगण होगा, जो महाराष्ट्र में नागपुर से सत्तर किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।इस बार जिस विषय पर चर्चा होगी वह है- सोशल मीडिया के बढ़ते प्रयोग के बीच हिंदी ब्लॉगिंग की प्रास्थिति। (Status of Hindi Blogging vis-a-vis Rise of Social Media.कार्यक्रम में देश भर के नामचीन ब्लॉगर्स, मीडिया विशेषज्ञों, तकनीकी जानकारों व हिंदी ब्लॉगिंग में रुचि रखने वाले वि…

रामधारी सिंह दिनकर की याद में

Keshav Kumar जब से पढ़ना सीखा है तब से इनकी कविता प्रिय रही, समझने लगा तो सबसे प्रिय हो गई। पढ़ते ही याद हो जाना इनकी कविताओं का सहज गुण है।
आज राष्ट्रकवि की जयंती है तो इनकी एक कविता आप सबको भी पढ़वानी बनती है।

जिनकी बाँहें बलमयी ललाट अरुण है
भामिनी वही तरुणी नर वही तरुण है
है वही प्रेम जिसकी तरंग उच्छल है
वारुणी धार में मिश्रित जहाँ गरल है

उद्दाम प्रीति बलिदान बीज बोती है
तलवार प्रेम से और तेज होती है!

छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाये
मत झुको अनय पर भले व्योम फट जाये
दो बार नहीं यमराज कण्ठ धरता है
मरता है जो एक ही बार मरता है

तुम स्वयं मृत्यु के मुख पर चरण धरो रे
जीना हो तो मरने से नहीं डरो रे!

स्वातंत्र्य जाति की लगन व्यक्ति की धुन है
बाहरी वस्तु यह नहीं भीतरी गुण है

वीरत्व छोड़ पर का मत चरण गहो रे
जो पड़े आन खुद ही सब आग सहो रे! See translation

गजल / सारिका चौधरी

Sarika Chaudhary 7 August at 11:02 · देखो हम कुछ नहीं बोलेंगे .....देखो हम कुछ नहीं बोलेंगे
आँखों आँखों में तोलेंगे ....पर मुंह से कुछ नहीं बोलेंगे

चाहे चीनी सैनिक आ जाएँ ....और हमको आँख दिखा जाएँ
ये देश है देखो हिजड़ों का ...ये सोच के सड़क बना जाये

वो सूअर का बच्चा पाकिस्तान ...जब तब देखो घुस आता है
धोखे से मेरे वीरों के ...सिर अलग -थलग कर जाता है

रोते हैं कितने देश भक्त ....आसूँ हो गये हैं जैसे रक्त
क्या करें की कैसे ले बदला ...यहाँ युवा हैं अपने में ही मस्त

सोयी पड़ी दस जनपथ है .... ये धरती खून से लथपथ है
पर मौनी कुछ नहीं बोलेगा ...आँखों - आँखों में तोलेगा

ना नेता अब कुछ बोलेंगे ...वो अपने वोट को तोलेंगे
क्यूँ मरे गिरों की बात करें ....तब तक वो चैन से सो लेंगे

मेरे देश भक्त मेरे वीरों से ....नेता के बच्चे अच्छे हैं
सिर कट गये तो कट जाने दो ..... क्या वो दस जनपथ के बच्चे हैं

अब समझ गयी है दुनिया भी ....भारत में हिजड़े बसते हैं
चाहे कितने जूत बजा जाओ ...ये बेशर्मों से हँसते हैं

अब तो आवाज़ उठानी है ....बड़ी दूर तलक पहुंचानी है
नेता की तरफ नहीं देखो ....इस जाति में ही बेईमान…