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दशरथ मांझी पर उपन्यास

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दशरथ माझी के जीवन पर आधारित उपन्यास का अंश पिछले दिनों एक खबर आई कि एक प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक ने दशरथ माझी के जीवन पर आधारित फिल्म बनाई है. दशरथ माझी सचमुच एक यादगार चरित्र है, जिसने पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना दिया था. फिल्म के बारे में पढ़ा ही था कि वरिष्ठ कवि-लेखक निलय उपाध्याय ने दशरथ मांझी के जीवन पर लिखा उपन्यास भेज दिया. उपन्यास अभी छपा नहीं है. लेकिन कह सकता हूँ कि दशरथ मांझी के बहाने बिहार के जीवन, समाज, राजनीति को लेकर एक शानदार उपन्यास है. मैं प्रकाशक तो हूँ नहीं कि छापकर आपके लिए उपन्यास पेश कर सकूँ. लेकिन आपके लिए उसका एक अंश तो प्रस्तुत कर ही सकता हूँ.  =======================================================
पहाड़ पर आगे की चट्टानें कैसी हैं और उन्हें कैसे काटा जाय, सोच भी नहीं पाए थे दशरथ किपूरे बिहार पर अकाल की भयानक छाया मड़राने लगी। गांव में जिन लोगों के पास रेडियो था, उनके दरवाजे पर सुवह शाम अकाल का समाचार सुनने वाले लोगों की भीड लग जाती । सूचना के साथ अफ़वाहों ने भी जोर पकड लिया था । यह तय कर पाना मुश्किल था कि घटनाओं की इस भीड में कौन सी सूचना सही है औ…

शंकर दयाल सिंह जी की स्मृति में राजभाषा पुरस्कार

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28 July 2012 at 14:41
देश भर के लगभग एक दर्जन सरकारी उपक्रमों ने साहित्यकार-सांसद स्वर्गीय शंकर दयाल सिंह जी की स्मृति में राजभाषा पुरस्कार / सम्मान योजना की शुरुआत करने का निर्णय लिया है. स्वर्गीय सिंह संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष थे और इसकी तीसरी उपसमिति के संयोजक भी. इस नाते देश भर के सरकारी उपक्रमों से उनका गहरा रिश्ता था और इन उपक्रमों में राजभाषा के कार्यों को गति देने में उनका बड़ा योगदान रहा था. उनकी प्रेरणा से ही अनेको लोक उपक्रमों में हिंदी पत्रिकाएँ शुरू हो सकी थी.
भारत सरकार के भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय ने सभी सरकारी उपक्रमों को पत्र लिख कर स्वर्गीय शंकर दयाल सिंह जी के ७५वे सालगिरह के उपलक्ष्य में इस कर्मठ हिंदीसेवी की स्मृति में ऐसी योजना चलाने की सलाह दी थी जिससे कि सरकारी कर्मचारियों को राजभाषा में कार्य करने की प्रेरणा मिल सके. स्वर्गीय शंकर दयाल सिंह जी का मानना था कि हम अपनी भाषा को छोड़ कर सार्वजनिक, सरकारी अथवा व्यक्तिगत कार्यों में हिंदी का प्रयोग न करें, तभी भारत बच सकेगा अन्यथा वह अपनी अस्मिता खो देगा. वह सरकारी हिंदी को बोलचाल की हिंदी…