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मंगलेश डबराल की 10 प्रिय कविताएं

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हिंदी दिवस: सौ बरस, 10 श्रेष्ठ कविताएं
मंगलेश डबराल साहित्यकार  शनिवार, 14 सितंबर, 2013 को 07:29 IST तक के समाचार

मुक्तिबोध ने अंधेरे में, ब्रह्मराक्षस, चांद का मुंह टेढ़ा है जैसी प्रसिद्ध कविताएं रचीं. हिंदी साहित्य में पिछले सौ वर्षों में जो सैकड़ों कविताएं प्रकाशित हुई हैं उनमें से मैंने अपनी पसंद से ये दस श्रेष्ठ कविताएं चुनी हैं. 1. अंधेरे में – गजानन माधव मुक्तिबोध
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समय बीतने के साथ वह अतीत की ओर नहीं गई, बल्कि भविष्य की ओर बढ़ती रही है. आठ खंडों में विभाजित इस कविता के विशाल कैनवस पर स्वाधीनता संघर्ष, उसके बाद देश की रा…
जेल-डायरी
गणेशशंकर विद्यार्थी


''आज लखनऊ जिला जेल में यह डायरी प्राप्‍त हुई। चार डायरियाँ थी, तीन बँट गईं, एक का इस्‍तेमाल मैं करूँगा।'' यह पंक्तियाँ गणेशशंकर विद्यार्थी ने 31 जनवरी 1922 को लिखी थीं। उक्‍त जेलयात्रा विद्यार्थीजी को, जनवरी 1921 में रायबरेली के एक ताल्‍लुकेदार सरदार वीरपाल सिंह द्वारा वहाँ के किसानों पर गोली चलवाने की विस्‍तृत रपट 'प्रताप' के संपादक गणेशशंकर विद्यार्थी और उसके मुद्रक-प्रकाशक शिवनारायण मिश्र वैद्य पर मानहानि का मुकदमा चलाया, जो लगभग छह महीने चला और 'प्रताप' के कोई 30 हजार रुपए उस पर खर्च हुए। लेकिन उससे 'प्रताप' की ख्‍याति, किसानों के हमदर्द अखबार के रूप में, दूर-दूर तक फैल गई। किसान जनता विद्यार्थीजी को 'प्रताप बाबा' कहकर पुकारने लगी। मुकदमे की पेशियों के दौरान सफाई पक्ष की जो 50 गवाहियाँ हुई उनमे पं. मोतीलाल नेहरू, पं. जवाहरलाल नेहरू, सी.एस. रंगाअय्यर जैसे विशिष्‍ट लोग अदालत के समक्ष पेश हुए। ... किंतु मुकदमे का फैसला अंतत: उक्‍त ताल्‍लुकेदार के पक्ष में हुआ। चूँकि दोनों व्‍यक्तियों पर दो-दो अभि…

काशी की प्रमुख पत्र-पत्रिकाएं / दिग्विजय त्रिपाठी

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दिग्विजय त्रिपाठी भारत में यदि कलकत्ता पत्रकारिता का जन्मस्थली रहा है तो काशी ने इसे पुष्ट किया है। खासकर हिन्दी पत्रकारिता तो काशी में ही पली-बढ़ी और जवां हुई। आदर्श पत्रकारिता के मूल्यों पर कलम के सिपाहियों ने समाज को आईना दिखाया। साथ ही निर्भीक रूप से ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ कलम चलाई और लोगों को पत्रकारिता के जरिये नवजागृत भी किया। इस दौरान सिर्फ गंभीर पत्रकारिता ही नहीं हो रही थी बल्कि उसके सभी आयामों पर कलम चले। जैसे- व्यंग्य, महिलाओं से जुड़ी पत्रिकाएं, बच्चों पर आधारित पत्रिकायें भी लोगों की पहुंच में थी। समाचार पत्रों में दैनिक सूचानाओं के साथ गंभीर लेख, साहित्य से जुड़े लेख, अग्रलेख, संपादकीय छपते थे। भारत में हिन्दी पत्रकारिता की शुरूआत सन् 1826 में कलकत्ता से युगल किशोर शुक्ल ने उदन्त मार्तन्ड साप्ताहिक् पत्र निकालकर किया। वहीं, काशी से निकलने वाला पहला समाचार पत्र बनारस अखबार था, जिसे राजा शिवप्रसाद सितारे हिन्द ने 1845 में निकाला था। पत्रकारिता के मूल्यों से इतर यह समाचार पत्र ब्रिटिश हुकूमत के पक्ष में लिखता था। साथ ही हिन्दी अखबार होते हुए भी इसके लेखों …