संदेश

June, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हिन्दी के प्रमुख कथाकार

प्रस्तुति-- रीना शरण

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
[छुपाएँ]
वा हिंदी के प्रमुख कथाकार व उपन्यासकार
अमरकांतअरुण कमलअरुणा सीतेशअलका सरावगीअसगर वजाहतअमृतलाल नागरआचार्य चतुरसेन शास्त्रीइलाचंद्र जोशीउदय प्रकाशउपेन्द्रनाथ अश्ककमलेश्वरकामतानाथकृष्ण चंदरकृष्ण बलदेव वैदकृष्णा सोबतीगिरिराज किशोरगीतांजली श्रीचित्रा मुद्गलजयशंकर प्रसाददीपक शर्माधर्मवीर भारतीनिर्मल वर्मापांडेय बेचन शर्मा उग्रप्रताप सहगलप्रेमचंदफणीश्वर नाथ रेणुभगवती चरण वर्माभगवानदास मोरवालभीष्म साहनीमन्नू भंडारीमनोहर श्याम जोशीममता कालियामैत्रेयी पुष्पामोहन राकेशमृदुला गर्गमृदुला सिन्हामिथिलेश्वरयशपालरवीन्द्र कालियारवीन्द्र प्रभातरांगेय राघव

बिहार की साहित्यिक पत्रकारिता - साहित्य और साहित्यिकार

प्रस्तुति-- प्रियदर्शी किशोर / देवेन्द्र किशोर


पत्रकारिता शुरुआती दौर में एक मिशन के रूप में सामने आयी थी लेकिन आज बदलते बाजारवाद संस्कृति के बीच यह शुद्ध रूप से व्यवसाय बन चुका है। तब और अब की पत्रकारिता में काफी बदलाव आ चुका है। फिर भी पत्रकारिता की ताकत को कोई चुनौती नहीं दे सकता और भारतीय प्ररिपेक्ष में तो इसकी भूमिका को भुलायी नहीं जा सकती है। पत्रकार, साहित्यिकार, राजनेता, समाज सुधारक या यों कहे कि अभिव्यक्ति की लड़ाई में शरीक सभी ने इसे हथियार बना कर अपनी आवाज बुलंद की। पत्रकारिता में विविध आयाम शामिल हुये । हर विधा के पत्र-पत्रिकाओं का बड़े पैमाने पर प्रकाशन हुआ बल्कि आज भी हो रहा है।
राजनीतिक, सांस्कृतिक, भाषाई, जाति, धार्मिक, खेल, वैज्ञानिक पत्रकारिता एक ओर जहंा अपनी प्रखारता दिखा रही थी वहीं पर साहित्यक पत्रकारिता भी अछूती नहीं रही । शुरू से ही साहित्यिक पत्रकारिता पूरे तेवर के साथ निखरती रही। इस क्षेत्र में सर्वप्रथम भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने अपने 'कवि वचन …