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विजय मोहन सिंह के प्रति नमन

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शोध संदर्श जर्नल added 2 new photos. प्रस्तुति-- अशोक सुमन 
दुखद ,.
......
रचनाकार और आलोचक विजय मोहन सिंह नही रहे ,इस बार के दिल्ली पुस्तक मेले से उनकी एक किताब लाया था थोड़ा -सा ही पढ़ पाया ,किताब ख़त्म होने के पहले उनकी सांसे ख़त्म हो गयी ,वही पुस्तक ,,,,......!!!!!!!!... Like · Comment ·

हिन्दी के तीन शीर्षस्थ कवि

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Ajitsinh Jagirdar shared Amitabh Bachchan's photo. 25 March at 23:47 · Amitabh Bachchan FB 888 - हिंदी साहित्य के तीन महारथ कवि
बच्चन, सुमित्रा नंदन पंत , राम धरी सिंह 'दिनकर'
प्रस्तुति-- अशोक सुमन

सत्ता की चाकरी ● / शहंशाह आलम

वे भीड़े थे इन दिनों
सत्ता की चाकरी में
अपने पूर्व के दिवसों को
समेट-लपेट
सत्ता की चाकरी में
लिप्त-तृप्त
वे ही प्रगतिशील
वे ही जनवादी
वे ही वामपंथी
वे ही समाजवादी
वे ही थे 'जनता का आदमी' अब
अब नींद थी सुख की
उन्हीं के जीवन में
जबकि उनकी कविता पड़ी थी
खाइयों खंदकों गुफ़ाओं में
अंधेरे में बिलकुल अलसाई
उनकी कविताओं में
रायते की गंध नहीं थी
न कोई बहती हुई नदी थी
न अंतरिक्ष न पट कोई खुला हुआ
अब बस सत्ता की भाषा थी
अब बस सत्ता के मुहावरे थे वीभत्स
वे मरे पड़े थे जैसे
सत्ता के अंधे गलियारे में।

प्यार

प्रस्तुति-- स्वामी शरण
अनुक्रम [छुपाएँ1प्यार का अर्थ2सच्चा प्यार:-3प्यार के रूप4प्यार के कई आधार हैं5प्यार के कई द्रुष्टिकोण हैं5.1राजनीतिक द्रुष्टिकोण5.2दार्शनिक द्रुष्टिकोण6प्यार करने के तरीके7प्यार जताने के लिये टिप्स8संदर्भ §प्यार का अर्थ[संपादित करें]प्यार एक अद्भुत अहसास है। प्यार अनेक भावनाओं का, रवैयों का मिश्रण है जो पारस्परिक स्नेह से लेकर खुशी की ओर विस्तारित है। ये एक मज़बूत आकर्षण और निजी जुड़ाव की भावना है। ये किसी की दया, भावना और स्नेह प्रस्तुत करने का तरीका भी माना जा सकता है। खुद के प्रति, या किसी जानवर के प्रति, या किसी इनसान के प्रति स्नेहपूर्वक कार्य करने या जताने को प्यार कह सकते हैं। कहते हैं कि अगर प्यार होता है तो हमारी ज़िन्दगी बदल जाती हैं।
प्राचीन ग्रीकों ने चार तरह के प्यार को पहचाना है: रिश्तेदारी, दोस्ती, रोमानी इच्छा और दिव्य प्रेम। प्यार को अकसर वासना के साथ तुलना की जाती है और पारस्परिक संबध के तौर पर रोमानी अधिस्वर के साथ तुला जाता है, प्यार दोस्ती यानी पक्की दोस्ती से भी तुला जाता हैं। आम तौर पर प्यार एक एहसास है जो एक इनसान दूसरे इनसान के…

भिखारी ठाकुर

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प्रस्तुति-- प्रवीण परिमल, प्यासा रुपक
लेख ♯ (प्रतीक्षित) गणराज्यकलापर्यटनदर्शनइतिहासधर्मसाहित्यसम्पादकीयसभी विषय ▼ भिखारी ठाकुर पूरा नामभिखारी ठाकुर जन्म18 दिसम्बर1887जन्म भूमिकुतुबपुर (दियारा) गाँव, सारन ज़िलाबिहारमृत्यु10 जुलाई, 1971अविभावकश्री दल सिंगार ठाकुर और श्रीमती शिवकली देवी कर्म भूमिबिहारकर्म-क्षेत्रकवि, गीतकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, लोक संगीतकार और अभिनेतामुख्य रचनाएँबिदेसिया, गबरधिचोर, बेटी-वियोग, भाई विरोध, गंगा स्नान आदि नागरिकताभारतीय भाषाभोजपुरीअन्य जानकारीराहुल सांकृत्यायन ने इन्हें 'अनगढ़ हीरा' कहा था तो जगदीशचंद्र माथुर ने 'भरत मुनि की परंपरा का कलाकार'। इन्हें 'भोजपुरी का शेक्सपीयर' भी कहा गया। अद्यतन‎17:30, 4 जुलाई 2014 (IST) भिखारी ठाकुर (अंग्रेज़ी: Bhikhari Thakur, जन्म: 18 दिसम्बर1887बिहार - मृत्यु: 10 जुलाई, 1971) भोजपुरी के समर्थ लोक कलाकार, रंगकर्मी लोक जागरण के सन्देश वाहक, नारी विमर्श एवं दलित विमर्श के उद्घोषक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक थे। भिखारी ठाकुर बहुआयामी प्रतिभा के व्यक्ति थे। वे एक ही साथ कवि, गीतकार, नाटककार…