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कुदरत की गोद में / विद्यासागर नौटियाल

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रेखांकन: लाल रत्नाकर


समय की चिंता करते हुए मैं सुबह काफ़ी जल्दी उस घर से निकल गई थी, जहाँ रात में ठहरी थी. मुझे अपने ज़िला मुख्यालय लौटने के लिए पहली सवारी बस पकड़ने की फिकर थी. उन इलाकों में सवारी गाड़ी का कोई भरोसा नहीं रहता, सुबह कै बजे निकल जाए या कितने घंटों तक उसकी कहीं गूंज तक सुनाई न दे. पहाड़ की घाटियों में वाहनों के चलने की आवाज़ें काफ़ी दूर-दूर तक सुनाई दे जाती हैं और उनकी गूंज बहुत देर तक कायम रहती हैं. चढ़ाई पर पाँच किलोमीटर दूर, किसी ऊँची चोटी से भी साफ़-साफ़ दिखाई दे जाती है नीचे घाटी में खिसकती-रेंगती हुई गाड़ियाँ. आपके साथ कोई और नहीं था दीदी? नहीं, सरिता मैं अकेली थी. रीजनल इंस्पेक्टर ऑफ गर्ल्स स्कूल्स. वह अध्यापक, जिसके घर पर मैं रात में ठहराई गई थी, मेरे साथ सड़क तक आना चाहता था. बहुत ज़ोर कर रहा था, साहब, आप अकेली कैसे जा सकती हैं, सड़क तक मैं चलूँगा आपके साथ. उसकी नज़रों में तो मैं ना जाने कितनी बड़ी अफ़सर थी. पर मैंने उसे साफ़ मना कर दिया. वह मान गया आपकी बात? मान नहीं गया, मैंने उसे जबर्दस्ती स्कूल जाने को मजबूर कर दिया. दरअसल सरिता, मैं उस घर में मेहमा…
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हिंदी कथाकार

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दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती

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निदा फ़ाज़लीनिदा फ़ाज़ली जन्म: 12 अक्तूबर 1938 निधन: 08 फ़रवरी 2016 जन्म स्थान दिल्ली, भारत कुछ प्रमुख कृतियाँ आँखों भर आकाश, मौसम आते जाते हैं , खोया हुआ सा कुछ, लफ़्ज़ों के फूल, मोर नाच, आँख और ख़्वाब के दरमियाँ, सफ़र में धूप तो होगी विविध 1998 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित जीवन परिचय निदा फ़ाज़ली / परिचय अभी इस पन्ने के लिये छोटा पता नहीं बना है। यदि आप इस पन्ने के लिये ऐसा पता चाहते हैं तो kavitakosh AT gmail DOT com पर सम्पर्क करें। आँखों भर आकाश / निदा फ़ाज़लीमौसम आते जाते हैं / निदा फ़ाज़लीखोया हुआ सा कुछ / निदा फ़ाज़लीप्रतिनिधि रचनाएँकभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता / निदा फ़ाज़लीबेसन की सोंधी रोटी पर / निदा फ़ाज़लीगरज बरस प्यासी धर्ती पर फिर पानी दे मौला / निदा फ़ाज़लीकभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे / निदा फ़ाज़लीवो शोख शोख नज़र सांवली सी एक लड़की / निदा फ़ाज़लीनयी-नयी आँखें / निदा फ़ाज़लीमुँह की बात / निदा फ़ाज़लीनयी-नयी पोशाक बदलकर / निदा फ़ाज़लीदिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती / निदा फ़ाज़लीकुछ तबीयत ही मिली थी / निदा फ़ाज़ली